मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

साहित्यश्री-3//6//दिलीप

विधा---हाइकु
जय माता दी।
चलता चल
माता तुझे पुकारे
पार उतारे।
बढ़ता चल
चल माता के द्वारे ।
भाग संवारे।
कहीं न रुक
पाँव थके न तेरे।
घोर अँधेरे।
चाहे कंकड़
पत्थर राह पड़ी।
मत घबरा।
पर्वत का तू
चीरता चल सीना।
बहे पसीना।
जोर से बोलो
गूंज उठे ये वादी।
जय माता दी।
दुःख में सुख
भरपूर मिलेंगे।
भाग खिलेंगे।
जय माता दी
गूंज रही नभ में।
माँ है सब में।
दर्शन होंगे
धीरज रख मन।
लगी कतारें।
भक्त कभी न
दर से खाली जाते।
आशीष पाते।
कहता चल
माता के दरबारे।
जय माता दी।
दिलीप भी है
द्वारे माँ, फरियादी।
जय माता दी

साहित्यश्री-3,//5//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"

विषय:-- जय माता दी।
जीवन पथ पर हर क्षण हर पल।
जय माता दी कहता चल।
सुबह दोपहरी सांझ रात हो।
चाहे कोई अर्जेन्ट बात हो।
सब कुछ पा जाने का दंभ हो।
या कुछ ना पाने का गम हो।
जीवन की हो कुछ अबूझ पहेली..
खोजे मिल न रहा हो हल।
जय माता दी कहता चल।
उच्छल बचपन का उमंग हो।
या यौवन जब अपना संग हो।
रोजी रोजगार की हो लाचारी।
या हो घरबार की जिम्मेदारी।
बुढ़ापे की लाठी कहीं दिखे ना..
उमर अनवरत रहा हो ढल।
जय माता दी कहता चल
जीवन पथ पर हर क्षण हर पल।
जय माता दी कहता चल।
रचना:- सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"
गोरखपुर,कवर्धा
9685216602

साहित्यश्री-3//4//राजेश कुमार निषाद

।। जय माता दी ।।
माता तुम्हें मनाने के लिए,
आये हैं तेरे जस गाने।
शरण में आये है हम तुम्हारे,
अपनी किस्मत जगाने।
हाथ जोड़ मै करूं आरती, जगत जननी माता की ।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
सबके बिगड़ी बनाती मैय्या,
भवसागर से पार लगाने वाली है।
पापियों के नाश करके मैय्या,
जग को दुष्टों से बचाने वाली है।
करू मै सेवा सुबह शाम ऐसी भाग्यविधाता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
काली चण्डी दुर्गा गौरी अनेकों तुम्हारे नाम है।
सबको शरण देने वाली तुम्हे मेरा प्रणाम है।
गुण गाऊँ मै माँ भवानी आपकी उदारता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( सामोद )
9713872983

साहित्यश्री-3//3//गुमान प्रसाद साहू

विषय - जय माता दी
शिर्षक-"जय माता दी बोलते चलो"
जय माता दी बोलते चलो, भक्तों मैय्या के द्वारे।
दूर करेंगी माँ शेरावाली, सब दूख दर्द को हमारे।
ऊँचे पहाड़ो में हैं बसी, मैय्या द्वार सजाये।
भक्त सभी सीढ़ियाँ चढ़के, दर्शन करने आये।
बम्लेश्वरी,दंतेश्वरी,वैष्णोदेवी, इन्ही के नाम हैं सारे।
जय माता दी बोलते चलो, भक्तों मैय्या के द्वारे।
बच्चें है हम सब उनके, ओ है माता हमारी।
एक बराबर सब उनके लिए, राजा रंक भिखारी।
भर देंगी माँ ज्योतावाली भक्तों, खाली झोली हमारे।
जय माता दी बोलते चलो, भक्तों मैय्या के द्वारे।
भक्त जनों पर पड़ा है, जब जब भी संकट भारी।
दानवों को मार गिराने, ली है मैय्या ने अवतारी।
पहाड़ा वाली की लगाते चलो, भक्तों सभी जयकारे।
जय माता दी बोलते चलो, भक्तों मैय्या के द्वारे।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम-समोदा (महानदी)
मो. :- 9977313968
जिला-रायपुर(छत्तीसगढ़)

साहित्यश्री-3//2//ज्ञानु मानिकपुरी"दास"

"जयमातादी"
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थामा है हाथ जबसे, बिगड़ी बनते साज।
जो भी आया शरण में,होते पूरण काज।
होते पूरण काज,राज है महिमा माँ का।
चरणों में होते माथ, होय कभी बाल न बॉका।
जय माता दी जपू,सदा ही अपने मुखसे।
गम नही नही फ़िकर,थामा है हाथ जबसे।
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ज्ञानु मानिकपुरी"दास"
चंदेनी कवर्धा
9993240143

साहित्यश्री-3//1//संतोष फरिकार

जय माता दी जय माता दी
सभी दोस्तो को जय माता दी
आ गया मां की नव रात्री पर्व
आ गया नव दिन नव रात
सब मीलकर बोलो जय माता दी
नव दिन से गुंजे का मां की महिमा
नव दिन गुंजे गा मां का जयकारा
सब मील कर बोलो जय माता दी
नव दिन के लिए आया है मां
नव रूप मे रहेगा मां का रूप
अलग अलग दिन मां का रूप
दुर्गा मां का रूप है नव प्रकार
सब मीलकर बोलो जय माता दी
डोगरी पाहाड़ मे निवास है मां
आपका लिला है सबसे नियारी
सब भक्त है आपके बच्चे है प्यारी
अपने बच्चो की करते हो देखभाल
करते हो मुशिबत मे रखवाली मां
सब मीलकर बोलो जय माता दी
दुर दुर से आते है मां आपका दर्शन
करने को भक्त आपके घर दुवार
दर्शन को पाके मां भुल जाते है
अपने दुख दर्द लौटते है घर दुवार
सब मीलकर बोलो जय माता दी
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#मयारू
संतोष फरिकार
देवरी भाटापारा
9926113995

//साहित्य-श्री-2 का परिणाम//

सादर नमस्कार

सबले पहले इस बात के लिये क्षमा चाहते हैं कि परिणाम विलंब से घोषित किया जा रहा है ।  वास्तव में नवरात्रि पर्व में व्यवस्तता के कारण समय अभाव रहा ।

साहित्य श्री 2 जिसका विषय - ‘अतिक्रमण‘ था । इस विषय पर कुल 13 रचनायें प्राप्त हुई । सभी मित्रों का प्रयास सराहनीय रहा । सभी रचनाकारों को इस प्रयास हेतु बधाई सह धन्यवाद । विषय कु गुणार्थ एवं रचना संरचना के वरियता के आधार पर साहित्य श्री 2 का यह सम्मान श्री गोपाल चन्द्र मुखर्जी दिया जाता है ।

श्री गोपाल चन्द्र मुखर्जी को छत्तीगढ़ साहित्य दर्पण की ओर से हार्दिक बधाई ।