।। जय माता दी ।।
माता तुम्हें मनाने के लिए,
आये हैं तेरे जस गाने।
शरण में आये है हम तुम्हारे,
अपनी किस्मत जगाने।
हाथ जोड़ मै करूं आरती, जगत जननी माता की ।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
आये हैं तेरे जस गाने।
शरण में आये है हम तुम्हारे,
अपनी किस्मत जगाने।
हाथ जोड़ मै करूं आरती, जगत जननी माता की ।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
सबके बिगड़ी बनाती मैय्या,
भवसागर से पार लगाने वाली है।
पापियों के नाश करके मैय्या,
जग को दुष्टों से बचाने वाली है।
करू मै सेवा सुबह शाम ऐसी भाग्यविधाता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
भवसागर से पार लगाने वाली है।
पापियों के नाश करके मैय्या,
जग को दुष्टों से बचाने वाली है।
करू मै सेवा सुबह शाम ऐसी भाग्यविधाता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
काली चण्डी दुर्गा गौरी अनेकों तुम्हारे नाम है।
सबको शरण देने वाली तुम्हे मेरा प्रणाम है।
गुण गाऊँ मै माँ भवानी आपकी उदारता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
सबको शरण देने वाली तुम्हे मेरा प्रणाम है।
गुण गाऊँ मै माँ भवानी आपकी उदारता की।
जय बोलो जय माता की, सब बोलो जय माता दी।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( सामोद )
9713872983
ग्राम चपरीद ( सामोद )
9713872983
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