शनिवार, 1 अक्टूबर 2016

साहित्यश्री-2//13//हितेश तिवारी

माना की ये नया जमाना है. पर बेजा कब्जे का इतिहास पुराना हैं
सुना है मैंने सबको यह कहते
इस पर रोक लगाना है। 
पर जिसकों मौका मिल जाएं
उसके लिए यें अनमोल खजाना है।
कुटिया से इमारत का सफर
पल भर में हो जाना है।
हमारे भू-माफियाओ का
धंधा पुराना है।
पर्यावरण बचाने हेतु
भू स्थानांतरण नियम बना ,जनता को संतोष दिलाना है।
पर आज इसका हनन तो
यूँ हो जाना है।
अब पर्या नहीं रहा
बंगलो का फसाना है।
राजनीति के दम पर खेल रहा जमाना है।
पर बेजा कब्जा का इतिहास पुराना है।
हितेश तिवारी
(धरोहर साहित्य समाज लोरमी)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें