।। एक कदम उजाले की ओर ।।
जितनी भीड़ बड़ रही है जमाने में
लोग उतने ही अकेले होते जा रहे है।
इस दुनिया के लोगो को कौन समझायें
सारे खिलौना छोड़कर जज्बातों से खेले जा रहे है।
इन सबसे तुम दूर रहो ना देखो मुड़कर पीछे की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
तुम स्वर्ग का सपना छोड़ दो
नर्क से अपना नाता तोड़ दो।
पाप पुण्य का लेखा जोखा तो ईश्वर का है
अपने सारे कर्म कुदरत पर छोड़ दो।
मन में ना रखो कोई भावना जो कर दे आपको कमजोर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
राहों में कितने भी मुश्किल हो
पर तुम निकल जाओगे।
कितने भी ठोकर खा लो चाहे
पर तुम सम्भल जाओगे।
ये अँधेरा है जो जुगनू से भी घबराता है
सदा तुम प्रकाशवान बनो न देखो सूरज की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
उम्र भर तुम्हे कोई साथ नही देगा
अकेला तुम्हे रहना है।
पथ में तुम्हारे कितने भी मुश्किलें आये
कठोर बन कर तुम्हे सहना है।
चिंताओं को दूर कर छोड़ दो उसे पीछे की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
जितनी भीड़ बड़ रही है जमाने में
लोग उतने ही अकेले होते जा रहे है।
इस दुनिया के लोगो को कौन समझायें
सारे खिलौना छोड़कर जज्बातों से खेले जा रहे है।
इन सबसे तुम दूर रहो ना देखो मुड़कर पीछे की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
तुम स्वर्ग का सपना छोड़ दो
नर्क से अपना नाता तोड़ दो।
पाप पुण्य का लेखा जोखा तो ईश्वर का है
अपने सारे कर्म कुदरत पर छोड़ दो।
मन में ना रखो कोई भावना जो कर दे आपको कमजोर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
राहों में कितने भी मुश्किल हो
पर तुम निकल जाओगे।
कितने भी ठोकर खा लो चाहे
पर तुम सम्भल जाओगे।
ये अँधेरा है जो जुगनू से भी घबराता है
सदा तुम प्रकाशवान बनो न देखो सूरज की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
उम्र भर तुम्हे कोई साथ नही देगा
अकेला तुम्हे रहना है।
पथ में तुम्हारे कितने भी मुश्किलें आये
कठोर बन कर तुम्हे सहना है।
चिंताओं को दूर कर छोड़ दो उसे पीछे की ओर
निरंतर बढ़ाते जा अपना एक कदम उजाले की ओर।
रचनाकार ÷ राजेश कुमार निषाद
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
ग्राम चपरीद ( समोदा )
9713872983
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