मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

साहित्यश्री-3,//5//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"

विषय:-- जय माता दी।
जीवन पथ पर हर क्षण हर पल।
जय माता दी कहता चल।
सुबह दोपहरी सांझ रात हो।
चाहे कोई अर्जेन्ट बात हो।
सब कुछ पा जाने का दंभ हो।
या कुछ ना पाने का गम हो।
जीवन की हो कुछ अबूझ पहेली..
खोजे मिल न रहा हो हल।
जय माता दी कहता चल।
उच्छल बचपन का उमंग हो।
या यौवन जब अपना संग हो।
रोजी रोजगार की हो लाचारी।
या हो घरबार की जिम्मेदारी।
बुढ़ापे की लाठी कहीं दिखे ना..
उमर अनवरत रहा हो ढल।
जय माता दी कहता चल
जीवन पथ पर हर क्षण हर पल।
जय माता दी कहता चल।
रचना:- सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"
गोरखपुर,कवर्धा
9685216602

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