साहित्य श्री -2 के लिये मेरी रचना.
अतिक्रमण
उलट रहे सब समीकरण
चंहु ओर है अतिक्रमण.
अतिक्रमण
उलट रहे सब समीकरण
चंहु ओर है अतिक्रमण.
गैया बेचारी का गोचर
लोगो ने है चर डाले
मरघट को घेर घार के
भुतों संग डेरा डाले.
इन जिन्दा भुतों को देख
हो रहा भय का संचरण
लोगो ने है चर डाले
मरघट को घेर घार के
भुतों संग डेरा डाले.
इन जिन्दा भुतों को देख
हो रहा भय का संचरण
आने जाने के रस्तो को
बंद किया दबंगो ने.
ताल पाटकर उस पर भी
कब्जा किया लफंगो ने.
जनता की तो त्राहि त्राहि है
पशुओ का भी हो रहा मरण.
बंद किया दबंगो ने.
ताल पाटकर उस पर भी
कब्जा किया लफंगो ने.
जनता की तो त्राहि त्राहि है
पशुओ का भी हो रहा मरण.
सब सरकारी जमीन हमारी
का कुछ नारा लगा रहे.
वोटो के लालच मे नेता
झुग्गी झोपडी बसा रहे.
लोकतंत्र की अन्धेरगर्दी का
है ये जीता जागता उदाहरण .
उलट रहे सब समीकरण
चंहु ओर है अतिक्रमण.
महेश पांडेय "मलंग"
पंडरिया कबीरधाम
का कुछ नारा लगा रहे.
वोटो के लालच मे नेता
झुग्गी झोपडी बसा रहे.
लोकतंत्र की अन्धेरगर्दी का
है ये जीता जागता उदाहरण .
उलट रहे सब समीकरण
चंहु ओर है अतिक्रमण.
महेश पांडेय "मलंग"
पंडरिया कबीरधाम
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