" एक कदम उजाले की ओर "
जागरे, मन जागरे,
नई सुबह की ओर कदम राख रे!
पराधीनता के अक्टपाश से
मुक्त होने उठ रे।
गर्जन देशप्रेमी सेनानी का
कदम कदम बाढाते जा,
नई संकल्प लेते जा
बेटी नारी बचाते जा।
मनाते हो परव दीपान्विता
नवरात्री, जागराता!
लक्ष्मी दुर्गा पूजते हो
कन्याभ्रूण भी हत्या करते हो!
महामाया रूठेगी
बंशबृद्धि रुखेगी।
अंगन में दीपक बुझेगा
अन्धेरा छा जाएगा!
मन, एक कदम आगे आ जा
बन्ध कर नारी निर्यातन प्रतारना।
दीप लक्ष्मी जगमगेगी
संसार उजला की ओर बढेगी॥
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( गोपाल चन्द्र मुखर्जी )
जागरे, मन जागरे,
नई सुबह की ओर कदम राख रे!
पराधीनता के अक्टपाश से
मुक्त होने उठ रे।
गर्जन देशप्रेमी सेनानी का
कदम कदम बाढाते जा,
नई संकल्प लेते जा
बेटी नारी बचाते जा।
मनाते हो परव दीपान्विता
नवरात्री, जागराता!
लक्ष्मी दुर्गा पूजते हो
कन्याभ्रूण भी हत्या करते हो!
महामाया रूठेगी
बंशबृद्धि रुखेगी।
अंगन में दीपक बुझेगा
अन्धेरा छा जाएगा!
मन, एक कदम आगे आ जा
बन्ध कर नारी निर्यातन प्रतारना।
दीप लक्ष्मी जगमगेगी
संसार उजला की ओर बढेगी॥
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( गोपाल चन्द्र मुखर्जी )
