बुधवार, 14 दिसंबर 2016

//साहित्य श्री 6 का परिणाम//

साहित्य श्री 6 जिसका विषय -‘नोट का चोट‘ था ।  जिस पर 10 रचनायें प्राप्त हुई । सभी रचनाकारों को इस आयोजन में सम्मिलित होने के लिये आभार आपके सद्प्रयास के लिये बधाई । इस आयोजन का परिणाम निम्नासार घोषित किया जाता है -

प्रथम विजेता- श्री एस एन बी साहब
द्वितीय विजेता- श्री आचार्य तोषण धनगांव
तृतीय विजेता-श्री गुमान प्रसाद साहू

सभी विजेता मित्रों को हार्दिक बधाई

//साहित्य श्री 5 का परिणाम//

सबसे पहले परिणाम विलंब से घोषित करने के लिये क्षमा चाहता हूॅ । दरअसल निर्णायक महोदय के व्यस्तता के कारण परिणाम में विलंब हो गया । साहित्य श्री 5 जिसका विषय -‘ घर का भेदी लंका ढाये‘ था ।  जिस पर बहुत कम रचना प्राप्त हुआ केवल 5 ।  इन रचनाओं प्रथम स्थान श्रीमती आशा देशमुख को घोषित किया जाता है ।

विजेता को कोटिश बधाई

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

साहित्यश्री-6//10//देवेन्द्र कुमार ध्रुव(

विषय -नोट का चोट....
जब से बड़े नोटों का चलन बंद हो गया,
बड़े लोगो का सारा महकमा दंग हो गया,
मंजर बदला सबका बदला ढंग हो गया,
लगा नोट का चोट अमीरों की खुमारी पे...
अर्थव्यवस्था में सुधार,सोच सभी तकलीफे सह रहे हैं,
यही है देश के विकास का आधार सभी कह रहे हैं,
अभी बहुत से काम रुक गये है नोटबंदी से
दिखा नोट का चोट हर काम और दुनियादारी पे....
आज लाचार बैठे है,बड़े बड़े धन्ना सेठ,
कमाने वाले रुपया,गरीब लोगो से ऐंठ,
सन्न है,जमा पूंजी को कागज होते देख,
नोट का चोट पैसो से भरी अलमारी पे...
कहाँ से आये है पैसे कभी नही बताते थे,
क्या क्या जतन कर पैसो को छुपाते थे,
सारा रुपया दबाके,कर नही चुकाते थे,
अब नोट का चोट कर की चोरी चकारी पे....
बन्द होगी जमाखोरी गलत तरीके का कारोबार,
बन्द होगा नकली नोटों का फलता फुलता व्यापार,
लगेगी लगाम अब तो कालाबाजारी पे
नोट का चोट हर दोगले व्यापारी पे...
अपनों का गला काटने वाली हर कटारी पे,
हर काम में लेनदेन पैसों की हिस्सेदारी पे,
चन्द रुपयों के लिये ईमान बेचने वालो पे,
नोट का चोट,देश से होने वाली गद्दारी पे....
चाहे बड़ा आदमी हो या बड़ा नेता हो,
काम के बहाने जो भी रिश्वत लेता हो,
भ्रष्ट तंत्र का मिटेगा अब तो मायाजाल
नोट का चोट, अब तो हर भ्रष्टाचारी पे....
सारी गतिविधियां देश द्रोह की,
बातें अपने स्वार्थ अपने मोह की,
मिट्टी में दबा पैसा मिट्टी हो जायेगा,
नोट का चोट, आतंकवाद और नक्सलवाद की बीमारी पे...
रचना
देवेन्द्र कुमार ध्रुव(डी आर)
बेलर
जिला गरियाबंद (छ ग)

साहित्यश्री-6//9//श्री एस एन बी साहब

विषय-‘‘नोट का चोट‘‘
विधा-विधा रहित,,
नोट की चोट , के लिए एक प्रयास
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कब से निशाने पे था
तीर तरकश से छूट गया
छलकने लगे
बरसने लगे
पाप का घडा
शायद! फूट गया
कह कहे हैं कहीं
कहीं मातम का दौर
नोट का चोंट ऐसे पड़ा
खिसक गया सिरमौर
हिसाब-किताब
भूलने लगे
कुछ न बन सका
तो मंडप में लड़ने लगे
जनता बेहाल
सरकार दे
ताल पे ताल
नाच ले प्यारे
कालिख छिपाने
रंग चढेगा धवल
उल्टी गंगा
बही है जब-जब
संतुलन
डगमगाया है तब-तब
दो-चार दिन की
तबाही आई है
ऐसे में ही तो
धरा मुस्कुराई है
सिर्फ चंद सिक्कों से
जिंदगी नहीं चलती
सिर्फ दो-चार दिन में
जिंदगी थम नहीं जाती
नोट का चोंट
जिंदगी जीने का
सलीका सिखाया है
प्यारे!नियम तो बना दिए
परिवर्तन प्रकृति का है नियम
जो न हिले वज्रघात से
क्या? अंदर इतना है संयम
कुछ भी हो
कुछ को हंसा गई
कुछ को रूला गई
नोट का चोंट निशाने पे है
सरकार की नजर खजाने पे है
नकली नोट पे असली चोंट
महज कागज का टुकड़ा बनाने पे है
अंत में कुछ अलग कहता हूँ
नोट का चोंट कब तक असर करेगा
हो मन में खोट फिर तिजोरी भरेगा
--श्री एस एन बी साहब

साहित्यश्री-6//8//दिलीप पटेल बहतरा

नोट की चोट
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दो नम्बरीयों को लाले पड गये सी गई सबकी होंट
दुम दबाकर बैठ गये है , जबसे बंद हो गई है नोट
बहुत हो गई थी भ्रष्टाचार
खतम होने को थी सदाचार
खूब दौडाया रेगीस्तां में ऊंटें,अब फस चुकी नैया मझधार,
कैसे पार लगेगी नैया जब मन मे भरी हो खोंट ही खोंट ......
दूम दबाकर बैठ गये है जब से बंद हो गई है नोट !
ईन्ही के दम पर ताकतें बढाई
सत्तासीन हो कुर्सी हथीयाई
सेज़ बहारो की पर सोते थे,
देखलो आज नही मिल रही है चार पाई
नींद भी कैसे आये इनको जब चादर हो गई हो छोट........
दूम दबाकर बैठ गये है जबसे बंद हो गई है नोट !
गरीबों की क्या जाने वाला
रुखा सूखा खाने वाला
जिसने गडा कर रखी हुई है,
छट पटा रहा है काला धन वाला
दात देता हू मै सरकार को कि हृदय मे कालाधनीयों की किये गम्भीर चोंट.......
दूम दबाकर बैठ गये है जबसे बंद हो गई है नोट !
सब कुछ दांव पर लग जायेगी
आगे जब जब चुनाव आयेगी
निस्वार्थ,बिना प्रलोभन के जनता जब किसी को चुन पायेगी,
लोक तंत्र मजबूत होगी जब सार्थक होगी हमारी वोट......
दूम दबाकर बैठ गये है जब से बंद हो गई है नोट !
दिलीप पटेल बहतरा, बिलासपुर
मो नं. 8120879287

साहित्यश्री-6//7//सुनिल शर्मा"नील"

नोटबंदी अभियान
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खेलते थे आजतक जो देश के 
सम्मान से
हाथ कीचड़ से सने सजते धवल
परिधान से
देख तड़पन आज उनकी अवनि
को राहत मिली
मुस्कुराई ""भारती""मोदी के इस
अभियान से |
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सुनिल शर्मा"नील"
थानखम्हरिया(छ. ग.)
7828927284

साहित्यश्री-6//6//आचार्य तोषण धनगांव

चुनकर मुखिया आ जाते, लोकतंत्र में वोट से।
देखो पड़ा हुआ आहत, जो नोट की चोट से।।
छिपा रखा जो कलाधन, आज वही बोल रहा।
जो कभी थे छुपे रूस्तम, राज यहाँ खोल रहा।।
देखो छिड़ गया अभियान, ना रूकेगा अब कभी।
एक हो तब विकास सबका, होगा खुशहाल सभी।।
कमीशन से रुपया गढ़े, जेब भरे जो लूट के।
हालत देखो अब उनकी, गिर गये पत्ते सूख के।।
नोट से ही काम बनता, बि_गाड़ता काम यही।
कहता "तोषण" घुंस न लेना, मा_नवता होगा वही।।
© ®
आचार्य तोषण धनगांव