शनिवार, 3 सितंबर 2016

साहित्यश्री-1//1//देवेन्द्र कुमार ध्रुव

शीर्षक -प्रथम पूज्य गणेश ...
श्री गणेश जी प्रथम पूज्य कहलाते है
तभी तो देवों में,सबसे पहले पूजे जाते है
आगमन उनका, शुभफल दायक है
घर में अपने भी आने को,उन्हें मना लेना ....
सबको भाई चारा का ,सन्देश देते है
माता पिता की सेवा का ,उपदेश देते है
माँगना प्रभु से,सबके लिये सुख शांति
कहना ,हमारा दुःख कलेश मिटा देना ....
आँखो में ,उनका सुंदर मुखड़ा बसा लेना
फिर दिल से,उनका जयकारा लगा लेना
सब कष्टो को, पल में हर लेंगे विघ्नहर्ता
बस उनको,अपना सारा दुखड़ा सुना देना ..
वो तो भक्तो के मन की हर बात, जानते है
सब रहते है बेचैन उनसे मिलने को, जानते है
वो दौड़े चले आते है ,हरबार भक्तो के घर
तुम अपने घर को,उनके लिए सजा लेना..
गणपति जी तो, रिद्धि सिद्धि के दाता है
बड़े ही ज्ञानी है,सब वेदों के ये ज्ञाता है
मिलजुल कर सब आरती करना उनकी
घण्टा ध्वनि प्यारी, साथ शंख बजा देना ...
बड़े भोले है ,नही जानते वो सख्ती करना
जितनी शक्ति हो ,तुम उतनी भक्ति करना
बस श्रद्धा से, जो हो वो तुम अर्पण करना
मोदक और लड्डू का भोग लगा देना...
अपनी ख़ुशी के लिए उन्हें हर साल बुलाते हो
गणेश चतुर्थी पर सब उन्हें घर घर बिठाते हो
बसआस्था और विश्वास कभी ना खोना तुम
भले आखिर में उनकी मूर्ति पानी में बहा देना..
रचना
देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डीआर)
फुटहा करम बेलर
जिला गरियाबंद (छ ग )

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