गुरुवार, 29 सितंबर 2016

साहित्यश्री-2//5//चोवा राम "बादल"

विषय----- बेजा कब्जा
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बेजा कब्जा हो चुका, बचे न अब मैदान ।
गांव की नार शौच को,कित जावें श्रीमान ।
कित जावें श्रीमान ,इक कमरे का घरौंदा ।
शौचालय की बात , बड़े घाटे का सौदा ।
कह " बादल" बौराय ,लईकन खेलै छज्जा ।
पट्टा दे सरकार , करावत बेजा कब्ज़ा ।
(चोवा राम "बादल")

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