शनिवार, 3 सितंबर 2016

साहित्यश्री-1//2//चोवा राम वर्मा "बादल"

प्रथम पूज्य श्री गणेश
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प्रथम पूज्य श्री गणेश तुम्हारे,चरणों में शीश झुकाता हूँ।
शब्द-सुमन श्रद्धा में पिरो,भावों का हार पहनाता हूँ।
स्वीकारो हे विघ्नहर्ता,शुभ कर्ता,
सर्व श्री प्रदाता ।
त्रिलोकी शिव शंभु-जगदम्बा,
जिनके पितु अरु माता ।
आओ विराजो हृदय आसन में,करजोर तुम्हे बुलाता हूँ।
प्रथम पूज्य श्री गणेश तुम्हारे,चरणों में शीश झुकाता हूँ ।1।
अज्ञानी हूँ, अभिमानी निर्धन हूँ,
पर सेवा का जज्बा है ।
मेरे घर आँगन में स्वामी ,
दुःख दर्दों का कब्जा है ।
क्षमा करो हे अंतर्यामी , मैं मुर्ख तुम्हें समझाता हूँ
प्रथम पूज्य श्री गणेश तुम्हारे,चरणों में शीश झुकाता हूँ।।2।।
मन-मूषक का करो सवारी,
चित चंचल है बहती वारि ।
हे गजवदन, उदर है भारी ।
सुना हूँ तुम्हें मोदक है प्यारी ।
अपने जीवन के मधुर पलों का, छप्पन भोग लगाता हूँ।
प्रथम पूज्य श्री गणेश तुम्हारे,चरणों में शीश झुकाता हूँ ।।।3 ।।।
हो प्रसन्न हे ज्ञान के दाता,
सब के भाग्य विधाता ।
देखो नक्सल आतंक से पीड़ित,
है प्यारी भारत माता ।
स्वर्ग धरा पर असुरों का डेरा,कश्मीर तुम्हें दिखलाता हूँ ।।।।4 ।।।।
प्रथम पूज्य श्री गणेश तुम्हारे,चरणों में शीश झुकाता हूँ ।4
("साहित्य श्री" हेतु छग साहित्य दर्पण में समर्पित )
रचनाकार-----चोवा राम वर्मा "बादल"
हथबंद

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