विषय - बेजाकब्जा(अतिक्रमण)
गांव शहर सभी जगह में, बेजाकब्जा का डेरा है।
अपने स्वार्थ के चलते लोग,
मंदिरों को भी घेरा है।
अपने स्वार्थ के चलते लोग,
मंदिरों को भी घेरा है।
नदी नालो की जमीने, जानवरों के चारागाह की।
काट रहे हैं जंगल को भी, बिना किसी परवाह की।
सभी मे कब्जा किये बैठे हैं लोग, कहते हैं कि ये मेरा है।
काट रहे हैं जंगल को भी, बिना किसी परवाह की।
सभी मे कब्जा किये बैठे हैं लोग, कहते हैं कि ये मेरा है।
वर्तमान में बची नहीं है जमीने, बस फाइलों में ही नक्शा है।
जगह हथियाने वालो ने तो, शमशान को भी नहीं बक्शा है।
अतिक्रमण के भेंट चढ़ रहा, आज पूरा देश मेरा है।
जगह हथियाने वालो ने तो, शमशान को भी नहीं बक्शा है।
अतिक्रमण के भेंट चढ़ रहा, आज पूरा देश मेरा है।
अतिक्रमण के मार सभी जगह, शहरीकरण का हवाला है।
सभी जगहो पर हो रहा बस, पैसे वालो का बोलबाला है।
बेजाकब्जा के जमीनों पर, सब नाम अपना उकेरा हैं।
गांव शहर सभी जगहो पर, बेजाकब्जा का डेरा है।
सभी जगहो पर हो रहा बस, पैसे वालो का बोलबाला है।
बेजाकब्जा के जमीनों पर, सब नाम अपना उकेरा हैं।
गांव शहर सभी जगहो पर, बेजाकब्जा का डेरा है।
रचना :- गुमान प्रसाद साहू
ग्राम:-समोदा (महानदी)
मोबा.:- 9977313968
जिला:-रायपुर छग
ग्राम:-समोदा (महानदी)
मोबा.:- 9977313968
जिला:-रायपुर छग
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