शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

साहित्यश्री-2,//9//सुखदेव सिंह अहिलेश्वर

कुंडली छंद--
लालच सुरसा की बहन,लालच का सिर फोड़।
जीवन मूल्य कर सुरक्षित,बेजा कब्जा छोड़।।
बेजा कब्जा छोड़,करने जन जीवन भला।
हिसगा रूंधानी तोड़,नफरत की फसले जला।।
सुम्मत बिरवा लगा,समरसता मे चल चला।
बबूल के पेड़ मे,फल आम है कहां फला।।
रचना:--सुखदेव सिंह अहिलेश्वर"अंजोर"
गोरखपुर,कवर्धा
9685216602

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