शनिवार, 17 सितंबर 2016

साहित्यश्री-1//13//महेश मलंग

साहित्य श्री हेतु एक मुक्तक
वरद विनायक मंगलमूर्ती मंगल करो गणेश |
विकट विघ्न को हरने वाले संकट हरो गणेश ||
दया तु रखना सब संभव है वांछा बचे ना शेष ,
गजानना तु नव निधियो से हमको वरो गणेश || 
महेश मलंग Pandariya

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