गुरुवार, 29 सितंबर 2016

साहित्यश्री-2//1//ज्ञानु मानिकपुरी "दास"

विषय -बेजकब्जा
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गांव गांव,शहर शहर में बेजकब्जा देखो।
बड़े बड़े रसूखदारों की रुतबा देखो।
कहा गई चारागाह, नदी नाला दोस्तों
इन जमातों की बड़ी बड़ी मकाँ देखो।
सरकारी फ़ाईलो की रकबा देखलो
वर्तमान में जमीन कितना बचा देखो।
पैसा फेको तमाशा देखो "ज्ञानु"
होती राजनीती की पनाह देखो।
'जिनकी लाठी उनकी भैस' हकीकत है
जहाँ पाये वहॉ महल आलिशा देखो।
रोती है आँखों के संग मेरा कलम भी
लाचार,बेबस,मजबूर गरीब जनता देखो।
ज्ञानु मानिकपुरी "दास"
चंदेनी कवर्धा
9993240143

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